Maa, an ode to my motherhood.

तेरे पाँव छूकर हर मुशकील का हल मिल जाता है|
तेरे गले लगकर मेरा हर दर्द मिट जाता है|
तेरी प्यारी लोरिया सुनकर, मैं गहरी नींद सोना चाहती हूँ|
तेरी मज़ेदार कहानियों को, मैं फिर से सुन्ना चाहती हूँ|
इतने बरस बीत गए माँ, तू आज भी मेरे लिए दुआए माँगती है|
तेरी पलके चाहे भीग जाये, मगर मेरे लिए तू खुशिया बुनती है|
कई बार तुझसे लड़कर,मैंने तेरे दिल को ठेस पहुँचायी है|
और उसकी सजा,मैंने ज़िन्दगी में ठोकर पाकर खायी है|
तेरी काया चाँद जैसी है माँ,तेरी ममता अध्भुत शक्ति है|

माँ तू है इसीलिए तो,धुप में भी मेरी ज़िन्दगी ठंडी छाँव जैसी है|

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2 thoughts on “Maa, an ode to my motherhood.

  1. Lovely ❤ I can see your Love towards your mom through this poem.

    Liked by 2 people

    1. mommy_scribbles Aug 22, 2018 — 21:22

      Absolutely 😇💕

      Like

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